इन सात मशहूर गानों में देव आनंद ने नहीं की थी लिप सिंक
dev anand
बॉलीवुड के चॉकलेटी हीरोज की लिस्ट बनाई जाए तो यह देव आनंद के नाम के बिना अधूरी होगी| अपने अंदाज, हाव-भाव और स्टाइल से दर्शकों की दीवाना बनाने वाले देव बाबू की एक स्माइल पर लड़कियां मरती थीं|

बॉलीवुड के चॉकलेटी हीरोज की लिस्ट बनाई जाए तो यह देव आनंद के नाम के बिना अधूरी होगी| अपने अंदाज, हाव-भाव और स्टाइल से दर्शकों की दीवाना बनाने वाले देव बाबू की एक स्माइल पर लड़कियां मरती थीं|

उनके गाने भी बहुत पसंद किए जाते थे, एक्साइटमेंट और पॉजिटिविटी से भरे ये गाने उस समय के युवाओं के जुबान पर चढ़े होते थे|देव आनंद भी अपने इन गानों के लिए काफी सेंसिटिव रहते थे| चाहे किसी गाने में उनके एक या दो शब्द भी क्यों ना हो वह लिप सिंक जरूर करते थे| जैसे कि आप 'होठों पे ऐसा बात मैं छिपा के चली आई' को ही लीजीए इस गाने में देव साहब ने ' शालू' कहते नजर आते हैं| वह हमेशा गाने में अपनी लाइंस पर लिप सिंक जरूर करते थे|

ऐसा ही एक गाना है 'आंखों ही आंखों में' इस गाने में देव आनंद एक ही लाइन दोहराते दिखते हैं| बाकी पूरा गाना शकीला का है. चाहे बात गुनगुनाने पर टिके लेकिन देव साहब हर गाने का हिस्सा होते थे| ऐसे में आज देखते हैं उनके वो गाने जिनमें देव साहब ने लिप सिंक नहीं किया|

साल 1956 में आई सीआईडी फिल्म के गाने में देव आनंद पर्दे पर शकीला और मीनू मुमताज के साथ नजर आए थे| यह गांव के सेट में फिल्माया गया एक गाना था जिसमें पूरे समय देव आनंद केवल मुस्कुराते नजर आते हैं |

फिल्म लव मैरिज(1959) में माला सिन्हा प्यार के इकरार को लेकर देव आनंद को चिढ़ाती नजर आती हैं | लेकिन मासूम बच्चे की तरह देव आनंद पूरे गाने में केवल सिर हिलाते नजर आते हैं|

काला बाजार(1960) के सच हुए सपने तेरे में भी वहीदा रहमान इंजॉय करती नजर रही हैं| वहीं दूसरी तरफ देव साहब पूरे गाने में कुछ सोचते हुए परेशान से नजर आते हैं |

साल 1960 में आई फिल्म 'बंबई का बाबू' के टाइटल ट्रैक में सुचित्रा सेन चॉकलेटी बॉय देव आनंद को छेड़ती नजर आती हैं| लेकिन देव साहब केवल फ्रेम में सुचित्रा की शैतानियों को इंजॉय करते दिखते हैं |

गाइड(1965) फिल्म का गाना 'आज फिर जीने की तमन्ना है' पूरी तरह से वहीदा रहमान का गाना है | लेकिन यह एक केयरिंग और चार्मिंग गाइड के बिना अधूरा लगता है|

तेरे मेरे सपने(1971) में 'जैसे राधा ने माला जपी श्याम की' गाने में मुमताज अपने प्यार का इजहार करती नजर आती हैं वहीं देव साहब केवल मुस्कुराते हुए इंप्रेस कर जाते हैं |

साल 1967 में आई ज्वेल थीफ का गाना रात अकेली है कई वर्जन में हमारे सामने चुका है| लेकिन तनुजा और देव आनंद के उस असली गाने तक कोई नहीं पहुंच सकता | इस गाने में भी देव बाबू ने लिप सिंक नहीं की थी |

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