भारत में तेजी से बढ़ रहा है बाल यौन शोषण : एनसीआरबी
भारत में तेजी से बढ़ रहा है बाल यौन शोषण : एनसीआरबी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की वार्षिक रिपोर्ट कहती है भारत में पिछले तीन साल में बच्चों के खिलाफ 4,18,385 अपराध दर्ज किए गए. इनमें पॉक्सो एक्ट के तहत करीब 1,34,383 मामले दर्ज हुए। पॉक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन अगेंस्ट सेक्सुअल ऑफेंस) जैसे कड़े कानून के बावजूद भारत में बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा के मामले कम नहीं हो रहे हैं, बल्कि इसमें साल दर साल इजाफा हो रहा है। महानगरों के अलावा छोटे शहरों में भी इस तरह के घिनौने अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है।


राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की साल 2020 की रिपोर्ट बताती है कि देश में बाल यौन शोषण के 47,221 मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में अधिकतर पीडि़त लड़कियां ही थीं। एनसीआरबी के मुताबिक यौन हिंसा और यौन शोषण की वारदात सबसे अधिक 16 से लेकर 18 वर्ष की लड़कियों के साथ हुईं। इस क्षेत्र में काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई बार मामले तो पुलिस तक नहीं पहुंचते हैं या फिर परिवार ही बदनामी के डर से उसे दबा देता है।

बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए नौ साल पहले पॉक्सो कानून बनाया गया था। सवाल यह है कि क्या कानून अपने उद्देश्य को पूरा करने में सफल रहा है? 2016 से 2020 तक (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार रिपोर्ट किए गए बाल यौन शोषण के मामलों की संख्या 2016 में 36,321 से बढ़कर 2020 में 47 हजार से अधिक हो गई. यह 31 प्रतिशत की वृद्धि है। रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में से सिर्फ 36 फीसदी ही पॉक्सो के तहत दर्ज होते हैं। ऑनलाइन यौन शोषण बदलती तकनीक और इसके दुरुपयोग के साथ तालमेल रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानूनों की विफलता की जांच करने वाले अधिकार समूह का कहना है कि संभावित पीडि़तों को लक्षित करने के लिए शिकारी तेजी से सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। अपराधी गुमनाम तरीके से काम करते हैं और वे बहुत सीमित विनियमन के तहत काम करते हैं।

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