भीमबेटका रॉक पेंटिंग और आश्रय पर हुआ वेबिनार
भीमबेटका रॉक पेंटिंग और आश्रय पर हुआ वेबिनार

भोपाल :  भीमबेटका रॉक पेंटिंग में 4 कलर लाल, सफेद, हरा और पीले कलर का उपयोग किया गया है। यह सभी कलर पत्तियाँ, पत्थर, हेमेटाइट आदि प्राकृतिक स्रोतों से बनाए गए हैं। यह रोचक तथ्य सेंट्रल इंडिया के रीजनल गाइड भोपाल के अजय सिंह चौहान ने पर्यटन मंत्रालय द्वारा आयोजित वेबिनार में बताये। उन्होंने बताया कि अभी हाल में ही जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम को भीमबेटका से एक फॉसिल मिला है, जो करीब ढाई करोड़ वर्ष पुराना है। इस प्रकार के फॉसिल यूक्रेन, रूस और चीन में भी मिले हैं। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की कार्बन डेटिंग प्रक्रिया के अनुसार भीमबेटका की रॉक पेंटिंग 30 से 35 हजार वर्ष पुरानी है। प्रसिद्ध पुरातत्वविद् विष्णु श्रीधर वाकणकर ने 1957-58 में नागपुर की यात्रा के दौरान विंध्य पर्वत श्रेणी में भीमबेटका की खोज की थी।

वर्ल्ड हेरिटेज साइट और विश्व की सबसे पुरानी रॉक पेंटिंग में से एक भीमबेटका की नृत्य और संगीत, बॉडी आर्ट, आखेट और पशुओं को चित्रित किया गया हैं। इस प्रकार की पेंटिंग्स को पिक्टोग्राफ कहा जाता है।  चौहान ने बताया कि भीमबेटका रॉक पेंटिंग और आश्रय में मानव जीवन की यात्रा चित्रित की गई है। जीवन के दिन-प्रतिदिन की गतिविधियाँ, पशु, आखेट, जंगल में उपयोगी चीजें एकत्रित करना आदि दिखाया गया है। वेबिनार का संचालन  मौतोषी नसकर ने किया। देश और प्रदेश के गाइड, पुरातत्व और इतिहास प्रेमियों ने वेबिनार में हिस्सा लिया।

भीमबेटका रॉक पेंटिंग और आश्रय, भारत में यूनेस्को की विश्व धरोहर रॉक साइट है। यह प्रागैतिहासिक रॉक पेंटिंग और रॉक शेल्टर के लिए बहुत लोकप्रिय है।

Share this story