एक शिक्षिका से प्रदेश की मुख्यमंत्री तक का सफर
mayawati
मायावती की राजनीती में शुरुआत एक चमत्कार की तरह ही था जो चमत्कार जनता के द्वारा किया गया था। ये बात भारत के पूर्व प्रधान मंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने भी बोली थी। वर्ष 1984 में, कांशी राम ने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की और उन्हें इसके सदस्य के रूप में शामिल किया। भारतीय राजनीति में यह उनका पहला कदम था। इनकी कांशी राम के साथ अच्छी तालमेल थी जिसके बाद कांशी राम ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया था और बाद ये 1995 में ये उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री बानी।  ये पुरे भारत के इतिहास में पहली अनुसूचित जाति की महिला मुख्य मंत्री थी।

मायावती एक भारतीय महिला राजनीतिज्ञ हैं और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमन्त्री रह चुकी हैं। वे बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष हैं। उन्हें भारत की सबसे युवा महिला मुख्यमंत्री के साथ-साथ सबसे प्रथम दलित मुख्यमंत्री भी होने का श्रेय प्राप्त है। वे चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और उन्होंने सत्ता के साथ-साथ आनेवाली कठिनाइओं का सामना भी किया है। उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत एक स्कूल शिक्षिका के रूप में की थी लेकिन कांशी राम की विचारधारा और कर्मठता से प्रभावित होकर उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। उनका राजनैतिक इतिहास काफी सफल रहा और 2003 में उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव हारने के बावजूद उन्होने सन 2007 में फिर से सत्ता में वापसी की। अपने समर्थको में बहन जी के नाम से मशहूर मायावती 13 मई 2007 को चौथी बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमन्त्री बनीं और पूरे पाँच वर्ष शासन के पश्चात सन 2012 का चुनाव अपनी प्रमुख प्रतिद्विन्द्वी समाजवादी पार्टी से हार गयीं।

मायावती उर्फ़ चंदावती देवी का जन्म 15 जनवरी 1956 को दिल्ली में हुआ था। उनकी माता का नाम रामरती और पिता का नाम प्रभु दयाल था। प्रभु दूरसंचार केंद्र में अफसर थे। मायावती के 6 भाई हैं। उन्होंने कालिंदी कॉलेज, दिल्ली, से कला में स्नातक की उपाधि ली और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से एल.एल.बी और बी. एड भी किया। उनके पिता उन्हें कलेक्टर बनाना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने अपना बहुत सारा वक़्त भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैय्यारी में लगा दिया। इसी दौरान उन्होंने शिक्षिका के रूप में कार्य करना शुरु किया। मायावती के जीवन में कांशी राम के बढ़ते प्रभाव से उनके पिता बिलकुल भी खुश नहीं थे। उन्होंने मायावती को कांशी राम के पद चिह्न पर चलने की सलाह दी फिर भी मायावती ने अपने पिता भी बात अनसुनी कर बड़े पैमाने पर कांशी राम द्वारा शुरू किये गए कार्यों और परियोजनाओं से जुड़ गयीं।

राजनैतिक जीवन

मायावती की राजनीती में शुरुआत एक चमत्कार की तरह ही था जो चमत्कार जनता के द्वारा किया गया था। ये बात भारत के पूर्व प्रधान मंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने भी बोली थी।  सन 1984 तक मायावती ने बतौर शिक्षिका काम किया। वे कांशी राम के कार्य और साहस से काफी प्रभावित थी। 1984 में जब कांशी राम ने एक नए राजनैतिक दलबहुजन समाज पार्टीका गठन किया तो मायावती शिक्षिका की नौकरी छोड़ कर पार्टी की पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता बन गयीं। भारतीय राजनीति में यह उनका पहला कदम था। उसी साल उन्होंने मुज्ज़फरनगर जिले की कैराना लोक सभा सीट से अपना पहला चुनाव अभियान आरंभ किया। सन 1985 और 1987 में भी उन्होने लोक सभा चुनाव में कड़ी मेहनत की। आख़िरकार सन 1989 में उनके दलबहुजन समाज पार्टी”  ने 13 सीटो पर चुनाव जीता।

धीरे-धीरे पार्टी की पैठ दलितों और पिछड़े वर्ग में बढती गयी और सन 1995 में वे उत्तर प्रदेश की गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री बनायी गयीं। ये पुरे भारत के इतिहास में पहली अनुसूचित जाति की महिला मुख्य मंत्री थी। सन 2001 में पार्टी के संस्थापक कांशी राम ने मायावती को दल के अध्यक्ष के रूप में अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। 2002-2003 के दौरान भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सरकार में मायावती फिर से मुख्यमंत्री चुनी गई। इस के पश्चात बीजेपी ने सरकार से अपना समर्थन वापिस ले लिया और मायावती सरकार गिर गयी। इसके बाद मुलायम सिंह यादव को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया।सन 2007 के विधान सभा चुनाव के बाद मायावती फिर से सत्ता में लौट आई और भारत के सबसे बड़े राज्य की कमान संभाली। मायावती के शासनकाल के दौरान उत्तर प्रदेश के बाहर बसपा का विस्तार नहीं हो पाया क्योंकी उनके निरंकुश शासन के चलते ज्यादातर पिछड़े वर्ग के लोगों ने उनसे मुंह मोड़ लिया। मायावती ने अपने कार्यकाल के दौरान दलित और बौद्ध धर्म के सम्मान में कई स्मारक स्थापित किये।

राजनीति में पहचान

मायावती अपने शाशनकाल में कई विवादों और घोटालों के आरोपों में जरूर रही हों पर उनका राजनितिक अभ्युदय सचमुच अध्भुत रहा है।एक सामान्य परिवार से आई दलित महिला ने ऐसा मक़ाम हासिल किया जैसा इस देश के इतिहास में कम ही महिलाओं ने किया है। विवादों की परवाह किए बिना, मायावती के समर्थको ने हर बार उनका साथ दिया और अपनी वफादारी साबित की है। मायावती ने दलितों के दिल में अपनी खुद की जगह बनाई है और दलितों में अपने प्रति विश्वास कायम किया है।

मायावती से जुड़े विवाद

वर्ष 2002 मेंकेंद्रीय जाँच ब्यूरो ने ताज हेरिटेज कॉरिडोर से संबंधित परियोजना में वित्तीय अनियमितताओं पर संदेह करते हुए कुछ अन्य लोगों के साथ उनके घर पर छापा मारा। हालांकि, जून 2007 में तत्कालीन राज्यपाल टी.वी. राजेश्वर ने घोषित कर दिया कि उनके खिलाफ कोई पर्याप्त सबूत नहीं था।सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में सीबीआई की याचिका को खारिज कर दिया और मायावती पर मुकदमा चलाने के लिए राज्यपाल को निर्देशित करने के लिए सहमत नहीं था।

सीबीआई ने औपचारिक स्रोतों के अनुरूप असंगत संपत्ति रखने के लिए उनके खिलाफ मामला दर्ज किया।मायावती और उनकी पार्टी ने दावा किया कि उनकी आय में समर्थकों और पार्टी के सदस्यों द्वारा दिए गए उपहार और योगदान शामिल थे।दिल्ली उच्च न्यायालय ने 3 अगस्त, 2011 को केंद्र सरकार द्वारा मायावती के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी।कोर्ट ने कहा कि उन्होंने दानकर्ताओं और समर्थकों की पहचान पूरी तरह से प्रकट की थी। 6 जुलाई 2012 कोभारतीयउच्च न्यायालय ने मामले को रद्द कर दिया।आखिरकार 8 अक्टूबर 2013 को सीबीआई ने मुकदमा बंद कर दिया।

मायावती पर आधारित पुस्तकें

"आयरन लेडी कुमारी मायावती " नामक पुस्तक वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद जमील अख्तर ने लिखी थी। यह पुस्तक 14 अप्रैल 1999 को डॉ. अम्बेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर श्री कांशी राम द्वारा प्रकाशित की गई थी।

"बहनजी: मायावती की राजनीतिक जीवनी " अनुभवी पत्रकार अजय बोस द्वारा लिखी गयी।

मायावती द्वारा लिखी गयी पुस्तकें

बहुजन समाज और उसकी राजनीति " को 3 जून, 2000 को पार्टी की पच्चीसवीं सालगिरह पर श्री कांशी राम द्वारा प्रकाशित किया गया था।

"मेरा संघर्षमय जीवन एवं बहुजन आंदोलन का सफरनामा " पुस्तक को 15 जनवरी, 2006 को मायावती के 50वें जन्मदिन पर श्री कांशी राम द्वारा प्रकाशित किया गया था।

कांशी राम जयंती की पूर्व संध्या पर 15 मार्च, 2008 को  "माई स्ट्रगल-रिडेन लाइफ एण्ड ऑफ बहुजन समाज "(मेरी और बहुजन समाज की संघर्ष यात्रा) प्रकाशित की गयी थी।

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