मानव सहित अंतरिक्ष कार्यक्रम - गगनयान
gaganyaan

गगनयान (Gaganyaan Mission) भारत का सबसे महत्वकांक्षी मिशन है, जिसको Indian Space Research Organization (ISRO) द्वारा अंजाम दिया जाना है। इस मिशन के सफल होने से भारत स्पेस एजेंसी का दबदबा विश्न में ओर बढ़ जाएगा।

आज भारत की अंतरिक्ष एजेंसी दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है | समय-समय पर यह space agency पूरी दुनिया में अपना लोहा मानवत रही है | अपने अद्भुत और असाधारण experiments के साथ-साथ यह एजेंसी अपने सस्ते space missions के लिए भी काफी जानी जाती है  और कम बजट में बहतरीन काम करने के लिए पूरी दुनिया से इसे काफी वाह-वाही मिलती रही हैइसी नाम को आगे बढ़ाते हुए अब भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO अपने पहले मानव अंतरिक्ष यान की और आगे बढ़ रही है, जिसका नाम “Gaganyaan” रखा गया है |

हाल ही में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने तमिलनाडु के महद्रगिरि में ISRO प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) में गगनयान कार्यक्रम के लिए क्रायोजेनिक इंजन का 720 सेकंड की अवधि के लिए का सफल परीक्षण किया। इसरो के अनुसार, इंजन के प्रदर्शन का परीक्षण अपने उद्देश्यों को पूरा करता है और परीक्षण की पूरी अवधि के दौरान इंजन के पैरामीटर, लगाए गए अनुमानों के 8लगभग अनुरूप रहे।

महत्व :

लंबी अवधि का यह सफल परीक्षण, मानव सहित अंतरिक्ष कार्यक्रम-गगनयान के लिए एक प्रमुख मील का पत्थर है। यह परीक्षण गगनथान के प्रक्षेपण यान में शामिल करने हेतु क्रायोजेनिक इंजन की विश्वसनीयता और मजबूती सुनिश्चित करता है।

 गगनयान कार्यक्रम की घोषणा कब की गई थी?

 गगनथान कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2018 को अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान की थी। पहले इसरो का लक्ष्य, भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ से पहले, 15 अगस्त, 2022 तक अपने पहले मानव सहित अंतरिक्ष मिशन, गगनयान को लॉन्च करना था। इस प्रक्षेपण के बाद, भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन शुरू करने वाला, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।

उद्देश्य:

गगनयान कार्यक्रम का उद्देश्य, भारतीय प्रक्षेपण यान पर मानव को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजने और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने की क्षमता प्रदर्शित करना है।

तैयारियां और प्रक्षेपण:

गगनयान कार्यक्रम के एक भाग के रूप में चार भारतीय अंतरिक्ष यात्री उम्मीदवार पहल ही रूस में सामान्य अंतरिक्ष उड़ान प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके है । इस मिशन के लिए. इसरो के हैवी- लिफ्ट लॉन्चर जी.एस.एल.वी. मार्क III' (GSLV Mk III) को चिह्नित किया गया है।

भारत के लिए मानव-सहित अंतरिक्ष मिशन की प्रासंगिकता

  • अत्यधिक मांग वाले अंतरिक्ष अभियानों में भागीदारी के माध्यम से भारतीय उद्योग को बड़े अवसर प्राप्त होंगे। गगनथान मिशन में प्रयुक्त लगभग 60% उपकरणों को भारतीय निजी क्षेत्र द्वारा निर्मित किया जाएगा।

  • रोजगार इसरो प्रमुख के अनुसार, गगनयान मिशन 15,000 नए रोजगार के अवसर सृजित करेगा, उनमें से 13,000 रोजगार निजी उद्योग में होंगे। इसके अलावा, अंतरिक्ष संगठन के लिए 900 व्यक्तियों की अतिरिक्त श्रमशक्ति की आवश्यकता होगी।

  • मानव सहित अंतरिक्ष उड़ान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सबसे आगे है। मानव सहित अंतरिक्ष उड़ानों से मिलने वालीचुनौतियां और इन मिशनों को स्वीकार करने से भारत को काफी लाभ होगा और भारत में तकनीकी विकास के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

  • इससे, अच्छे अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा मिलेगा। उचित उपकरणों सहित बड़ी संख्या में शोधकर्ताओं के शामिल होने से मानव सहित अंतरिक्ष उड़ानों (Human Space flights-HSF) से खगोल-जीव विज्ञान, संसाधन खनन, ग्रह रसायन विज्ञान, ग्रह कक्षीय अभिकलन और कई अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अनुसंधानों का विस्तार होगा।
  • मानव-सहित अंतरिक्ष उड़ान, राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य लोगों के साथ-साथ युवाओं को प्रेरणा प्रदान करेगी। यह, युवा पीढ़ी को उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी और उन्हें भविष्य के कार्यक्रमों में चुनौतीपूर्व भूमिका निभाने में सक्षम करेगी।

  • भारत, मानव सहित अंतरिक्ष मिशन शुरू करने वाला चौथा देश होगा। गगनयान न केवल देश में प्रतिष्ठा लाएगा, बल्कि अंतरिक्ष उद्योग में एक प्रमुख भागीदार के रूप में भारत की भूमिका भी स्थापित करेगा।

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