यह 1947 का नहीं 2021 का भारत है, अब दोबारा नहीं होगा देश का विभाजन: मोहन भागवत
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नई दिल्ली: "मातृभूमि का विभाजन, देश का विभाजन, न भूलने वाला विभाजन है, ये न मिटने वाली वेदना है और ये तभी खत्म होगी, जब विभाजन खत्म होगा,, जब ये निरस्त होगा," ये बात आज राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक किताब के विमोचन के मौके पर कही

मोहन भागवत ने कहा कि विभाजन के बाद उनका जन्म हुआ और विभाजन के 10 साल बाद समझ आया और जब समझ में आया तो नींद नहीं आयी, उन्होंने कहा, विभाजन के इतिहास का अध्ययन होना चाहिए, जीती जागती भारतमाता के विभाजन का अध्यन होना चाहिए।

मोहन भागवत ने कहा, भारत के पीएम को संविधान के साथ चलना पड़ता है लेकिन उनको भी 14 अगस्त को कहना पड़ता है कि इस विभाजन को भूलना नहीं चाहिए, इसलिए जो खंडित हुआ उसे अखंड बनाना होगा, विभाजन के समय सबसे पहली बली मानवता की हुई।

उस समय खून की नदिया ना बहें, इसलिए ये किया गया, लेकिन उसके बाद से अब तक बहुत खून बहा है, इस विभाजन से कोई सुखी नहीं, इस्लाम का आक्रमण और अंग्रेजों का आक्रमण इसकी वजह है।

मोहन भागवत ने कहा इस्लाम का आक्रमण जो आया, उसके बारे में गुरुनानक जी ने सावधान किया था, उन्होंने कहा कि ये आक्रमण हिन्दुस्तान पर है, इसका पूजा से संबंध नहीं, परवर्ती से संबंध है, उस दौरान कहा गया कि जिसको रहना है हमारे जैसा रहना होगा, भक्ति की कट्टरता अपने लिए हो।

ये समझ में आती है लेकिन दूसरों के लिए ये करना, इस प्रवृत्ति को छोड़ना पड़ेगा, योजनाबद्ध तरीके से विभाजन का षड्यंत्र किया गया, ब्रिटिश ने सोचा इनको तोड़ना होगा, ये चाल उनकी चली और विभाजन हुआ, लेकिन 15 अगस्त 1947 के बाद भी संघर्ष खत्म नहीं हुआ, भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे, आज भी लगते है, इसलिए इतिहास के सत्य सामना किया जाना चाहिए।

मोहन भागवत ने कहा, एक पक्ष मुसलमान कहता था, एक हिन्दू, क्या हुआ, पाकिस्तान हुआ, सब मुसलमान नहीं गए, जिनको रहना था वो यहीं रहे, फिर भी दंगे होते है ये मुसलमान को सोचना चाहिए, मुसलमानों को अपनी सोच कि हमारे जैसे रहना है ये वाली विचारधारा छोड़नी होगी।

भागवत ने कहा कि 'राजा सबका होता है, राज्य किसी पूजा का नहीं होता, राज्य धर्म का होता है, सबकी अपनी पूजा होती है, राजा का धर्म सबको जोड़ना है और वो धर्म सभी की उन्नति करने वाला होता है।

भागवत ने कहा कि जो कहते हैं कि हंस कर लिया है पाकिस्तान, लड़ कर लेंगे हिंदुस्तान, उनको बता देना चाहता हूं कि ये 2021 है 1947 नहीं, विभाजन के समय बहुत बड़ी ठोकर खाई है, इसको भूलेंगे नहीं इसलिए अब विभाजन संभव नहीं, जो इसके लिए प्रयास करेगा तो उसके टुकड़े होंगे।

मोहन भागवत ने विभाजन को एक योजना बद्ध षड्यंत्र बताते हुए कहा कि उस दौरान धमकी की भाषा को नरमाई से शांत करने का प्रयास किया गया, राष्ट्रीय ध्वज के रंग बदल दिए क्योंकि उनको बुरा लगेगा, उनकी मांगे मानी क्योंकि उनको बुरा लगेगा, इतिहास में ये सत्य है कि हमारे लोग भाग गए, जहां जहां स्वयंसेवक थोड़ी संख्या में थे वहां वहां मजबूती से संगठित हुए।

मोहन भागवत ने कहा, 'इस पुस्तक को पढ़कर हमने जो गलती की है उसको जानना है, लड़ना पड़ा लड़ेंगे, मरना पड़े तो मरेंगे, कर्त्तव्य बुद्धि से युद्ध करना पड़े तो करना है, द्वेष से नहीं कर्तव्य के लिए करना है, हिंदू कहता है कि सब रहेंगे,, साथ रहेंगे,, अनुशासन में रहेंगे,, हमारी पहचान ही हिंदू है,, उसको मानने में क्या हर्ज है? हमने अपनी पूजा बदली होगी लेकिन पूर्वज नहीं बदले होंगे।

मोहन भागवत ने घर वापिसी का संकेत देते हुए कहा कि आपको लगता है कि पूर्वजों के घर में वापस आना है तो आइए,, हम स्वागत करेंगे लेकिन अगर नहीं लगता है तो अपनी पूजा में पक्का रहिए, लेकिन मातृभूमि का सम्मान ज़रूरी है।

पूरे समाज की भारत माता है, उसका सम्मान होना चाहिए, विभाजन के इस दर्दनाक इतिहास की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए, अगर लड़ना पड़े तो लड़ेंगे,, ताकि फिर पुनरावृति ना हो, अपने अखंड स्वरुप में भारत माता हो, वो दिन देखना है।

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