कमजोर विधायकों का टिकट काटना भी चुनौती
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पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 57 सीटें जीती थीं, अब आगामी चुनाव में पार्टी के समक्ष अपने इस प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती है। अब जबकि प्रत्याशी चयन प्रक्रिया अंतिम दौर में है, भाजपा को कमजोर माने जा रहे विधायकों की सीटों पर उनसे मजबूत विकल्प तलाशने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

उत्तराखंड। हर विधानसभा चुनाव में सत्ता में परिवर्तन का मिथक तोड़ने के लिए 60 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य तय कर मैदान में उतरी भाजपा टिकट बटवारे से पहले एक नई चुनौती से जूझ रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती से पार पाने के लिए भाजपा अपने कमजोर माने जा रहे एक-तिहाई विधायकों की जगह नए चेहरों को मौका देना चाहती है, मगर सशक्त विकल्पों के अभाव में पार्टी को इससे पीछे हटना पड़ सकता है।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए दूसरे चरण में 14 फरवरी को मतदान होना है, इसके लिए 28 जनवरी तक नामांकन किए जाएंगे। अब राजनीतिक दलों के पास अपने 70 प्रत्याशी घोषित करने के लिए दो सप्ताह का समय शेष है। भाजपा पिछले तीन-चार महीनों से जिताऊ प्रत्याशियों की तलाश कर रही है। पिछले वर्ष अगस्त में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के उत्तराखंड प्रवास के दौरान मंथन के बाद यह बात सामने आई थी कि प्रदर्शन के पैमाने पर खरा उतरने वाले विधायकों को इस चुनाव में मौका नहीं दिया जाएगा। लेकिन अब जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, भाजपा अब अपने अधिकांश विधायकों को फिर से मैदान में उतार सकती है, महज 8 से 10 विधायकों के टिकट पर संकट नजर रहा है। प्रत्याशियों की पहली सूची नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले जारी करने की तैयारी है, शेष नाम 25 जनवरी तक फाइनल हो सकते हैं।

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