संविधान बचाओ, देश बचाओ सम्मेलन लखनऊ में 12 दिसंबर को
संविधान बचाओ, देश बचाओ सम्मेलन लखनऊ में 12 दिसंबर को

आगरा-DVNA। ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ’ अभियान कार्यक्रम के संयोजक एवं राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य अरुण श्रीवास्तव ने आगरा में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा देश पर थोपी जा रही नीतियों के चलते लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के मूल्य खतरे में पड़ गए हैं । गैर बराबरी, बेरोजगारी, महंगाई चरम पर है। सार्वजनिक संपत्ति को मिट्टी के दाम पर चंद घरानों को बेचा जा रहा है। 356 दिन से चल रहे किसान आंदोलन में 700 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं, लेकिन सरकार सुनवाई करने को तैयार नहीं है। किसान ,किसानी और गांव को नष्ट कर सरकार किसानों की जमीन और खेती को अडानी – अम्बानी को सौंपने को आमादा है ] चार श्रम कानूनों को समाप्त कर चार लेबर कोड देश के मजदूरों पर थोपे जा रहे हैं। समाज में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति को थोपा जा रहा है तथा अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर फर्जी मुकदमे लगाकर जेल में डाला जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में संविधान और देश को बचाने के लिए संपूर्ण विपक्ष का एकजुट होना आवश्यक है।
अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ अभियान’ में आगामी 12 दिसंबर को रविंद्रालय, लखनऊ में संविधान बचाओ, देश बचाओ सम्मेलन आयोजित किया है। जिसमें उत्तर प्रदेश में ‘भाजपा हराओ -उत्तर प्रदेश बचाओ’ अभियान की शुरुआत की जाएगी।
कार्यक्रम के संयोजक अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के जिस जिले में बैठक आयोजित की जा चुकी है तथा आज आगरा में हुई बैठक में आगरा मंडल में अभियान को जोर -शोर से चलाने की रणनीति तय की गई।
उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष एकजुट नहीं होगा तो उत्तरप्रदेश के मतदाता बंगाल के मतदाताओं की तरफ एकजुट होकर जनविरोधी योगी सरकार को हटाएगी ।
अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि 29 अगस्त को कांस्टीट्यूशन क्लब, दिल्ली में ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ सम्मेलन’ आयोजित कर 15 सूत्रीय न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय किया गया है,जिसके आधार पर विपक्षी एकता कर देश को बचाया जा सकता है। न्यूनतम साझा कार्यक्रम में कहा गया है कि
1.भारत का संविधान तथा इसके मौलिक सिद्धांत, धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक मूल्य, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति और शांतिपूर्ण प्रतिरोध की आजादी भाजपा की मोदी सरकार के सात वर्षीय शासन में गंभीर खतरे में है अतः हम भारत के गणतांत्रिक संविधान को बचायेंगे तथा इसके मूल्यों की रक्षा करेंगे।

  1. केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार की निरंतर जन – विरोधी आर्थिक नीतियों तथा कोरोना महामारी से निपटने में भारी विफलता के कारण देश की अर्थव्यवस्था भयंकर संकट का सामना कर रही है जिसके परिणामस्वरूप लाखों नौकरियों का अभूतपूर्व नुकसान हुआ है और बेरोजगारी में तेजी से वृद्धि हुई है, अतः हम ऐसी जनहितकारी एवं रोजगार मूलक आर्थिक नीतियां बनाएंगे ताकि देश के युवाओं को प्रतिवर्ष लाखों नौकरियां तथा रोजगार के अवसर मिले और वे सम्मान से जी सकें। खेती और उद्योगों में रोजगार मूलक तकनीक को प्राथमिकता देंगे तथा मनरेगा में कार्य दिवस और पारिश्रमिक बढ़ाएंगे।
  2. कोरोना महामारी में लाखों लोगों को अस्पताल की कमी, समुचित स्वास्थ्य सेवा के अभाव, आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं की भारी कमी और ऑक्सीजन न मिलने से असमय जान से हाथ धोना पड़ा । अतः हम संपूर्ण देश में सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा तथा ग्रामीण और शहरी भारत के प्रत्येक जिले के प्रखंड में एक सरकारी अस्पताल का निर्माण करेंगे तथा सबसे निचली प्रशासनिक इकाई में स्वास्थ्य एवं उपचार की समुचित व्यवस्था करेंगे।
  3. शिक्षा किसी समाज की सफलता तथा विकास की कुँजी है किंतु नरेंद्र मोदी सरकार लगातार सरकारी शिक्षण संस्थानों को बर्बाद कर रही है और स्कूल से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों को निजीकरण की ओर धकेल कर शिक्षा का बाजारीकरण कर रही है। इसके कारण समाज के वंचित और हाशिये पर स्थित लोग शिक्षा नहीं ले पायेंगे। अतः हम सरकार के द्वारा सभी के लिए कक्षा 12 वर्ग तक समान तथा गुणवत्तापूर्ण मुफ़्त शिक्षा सुनिश्चित करेंगे।
  4. कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला है किंतु नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद में अलोकतांत्रिक तरीक़े से तीन कृषि विरोधी कानून पारित कराकर खेती को कारपोरेट के हवाले करने का षड्यंत्र किया है और किसानों के कृषि उत्पाद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त कर दिया है । केंद्र सरकार सोच समझकर कृषि के निजीकरण को बढ़ावा देकर पूंजीपतियों और निगमों को उनके लाभ के लिए सौंप रही है। अतः हम ऐसे तीनों कृषि विरोधी कानूनों को तुरंत निरस्त कर , कृषि उत्पाद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करेंगे। हम संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 9 माह से चलाए जा रहे आंदोलन का पुरजोर समर्थन करते हैं और आंदोलन में शहीद किसानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
  5. विकास के नाम पर ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के जमीन, जल और जंगल पर कब्जा तथा जीवन के संसाधनों को छीनकर बनती महाकाय करोड़ों की योजनाओं के कारण आदिवासी, किसान, मछुआरे, शहरी गरीब आदि समुदाय विस्थापित और वंचित हो रहे हैं। अतः हम स्थानीय समाज का संसाधनों पर अधिकार ग्राम सभा के ‘पेशा कानून’ के तहत तथा संवैधानिक दायरे में उनकी हकदारी सुनिश्चित करेंगे
  6. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार श्रमिकों के प्रतिरोध और हड़ताल के लोकतांत्रिक अधिकार को समाप्त करने के लिए मजदूर एवम श्रमिक विरोधी चार श्रम संहिता लाई है। अतः हम ऐसे सभी श्रमिक विरोधी लेबर कोड को तुरंत रद्द करेंगे और श्रमिकों के प्रतिरोध और हड़ताल के लोकतांत्रिक अधिकार सुनिश्चित करेंगे।
  7. राजद्रोह कानून (sedition law), राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम(NSA), गैर- कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) जैसे तमाम नागरिक स्वतंत्रता विरोधी कानूनों का नरेंद्र मोदी सरकार के काल में पुलिस तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों के द्वारा नागरिक समाज और मानव अधिकार संगठनों के लोकतांत्रिक आंदोलन के दमन के लिए नग्न दुरूपयोग आम बात हो गयी है जो सीधे सीधे संविधान और लोकतंत्र पर हमला है। अतः हम ऐसे तमाम नागरिक स्वतंत्रता विरोधी कानूनों को तुरंत समाप्त करेंगे और नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रतिरोध और असहमति के अधिकार को सुनिश्चित करेंगे।
  8. मोदी सरकार के काल में लगातार दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न बढ़ता जा रहा है और सरकारी एजेंसियां तथा उनके अधिकारों की रक्षा करने वाले संवैधानिक और सरकारी आयोग मूकदर्शक बनी हुई है। अतः हम ऐसे सख्त कानून बनाएंगे और उसे प्रभावकारी तरीके से लागू करेंगे ताकि ऐसे अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिल सकें।
  9. संवैधानिक तथा सरकारी संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की अधिनायकवादी कार्यप्रणाली तथा उनके उग्र समर्थकों के कारण ऐसी संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए लगातार खतरा बढ़ रहा है और ये संवैधानिक संस्थायें स्वतंत्र तथा निर्भीक होकर अपने संवैधानिक दायित्वों तथा कर्तव्यों का पालन नहीं कर पा रही हैं अतः हम ऐसे राजनैतिक वातावरण का निर्माण करेंगे ताकि ये संवैधानिक संस्थायें तथा सरकारी एजेंसियां तथा न्यायपालिका, चुनाव आयोग, आर.बी.आई., सी.ए.जी., सी.बी.आई., ई,डी आदि स्वतंत्र तथा निर्भय होकर संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वाह कर सकें।
  10. निजीकरण तथा मोनेटाइजेशन के नाम पर सरकारी बैंक और बीमा कंपनियों सहित सार्वजनिक उपक्रमों की नीलामी, सरकारी संपत्तियों की औने-पौने दाम पर मेगा बिक्री, खास पूंजीपतियों की सहयोगी भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार के आर्थिक मंत्र हैं। अतः हम सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी संपत्तियों की रक्षा करेंगे और इसे अधिक से अधिक सशक्त बनायेंगे ताकि इसमें अधिक रोजगार के अवसर बढ़े और जनहित का कार्य हो।
  11. मीडिया लोकतंत्र की जीवन – रेखा है किंतु मीडिया संस्थानों पर निगमों के वित्तीय नियंत्रण तथा नरेंद्र मोदी सरकार के काल में सरकारी एजेंसियों के भय के कारण मीडिया मोदी सरकार तथा उसके वैचारिक संगठनों के मुख-पत्र का कार्य कर रही है इसलिए हम ऐसा राजनीतिक वातावरण सुनिश्चित करेंगे ताकि मीडिया स्वतंत्रतापूर्वक व भयमुक्त होकर लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ तथा नागरिक स्वतंत्रता के सजग प्रहरी के रूप में कार्य कर सके।
  12. भाजपा और नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारतीय राज्य तेजी से एक फासीवादी राज्य में बदलता जा रहा है इसलिए हम लोकतंत्र की रक्षा करेंगे, धर्म निरपेक्षता तथा बहुलता को पुनर्स्थापित करेंगे और सबसे बढ़कर भारतीय राज्य को एक सच्चा कल्याणकारी राज्य बनायेंगे ताकि दलितों, आदिवासियों, पिछड़े, अल्पसंख्यक व महिलाओं के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके।
  13. भ्रष्टाचार व अपराधी मुक्त राजनीति और ई वी एम मुक्त निर्वाचन के प्रति हम प्रतिबद्धता व्यक्त करते हैं। हम राजनीतिक दलों के वित्तीय संसाधनों को सूचना के अधिकार कानून के दायरे में लाकर राजनीति को पारदर्शी तथा उत्तरदाई बनाएंगे। हम चुनाव सुधार करके राज्य के द्वारा निर्वाचन के लिए वित्तीय कोष का प्रावधान करेंगे ताकि निर्वाचन में धन शक्ति का प्रभाव न्यूनतम किया जा सकें आदि शामिल है।
    15 सम्मेलन में जाति जनगणना के लिए चलाए जा रहे आंदोलन और उसकी मांगों का समर्थन करते हुए कहा गया कि विकास की नीति को सही तरीके से बनाने में पिछड़े वर्गों और अन्य जातियों की जनगणना सहायक होगी ,जिससे वंचित वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
    सम्मेलन की आयोजन समिति में जस्टिस कोलसे पाटील( महाराष्ट्र), श्री अरुण कुमार ( बिहार), श्री बी आर पाटिल( कर्नाटक ) , श्री श्याम रजक( बिहार) , श्री अरुण श्रीवास्तव( यू पी) , डॉ सुनीलम( मध्यप्रदेश) , श्री शंकर आजाद( झारखंड ) , श्री कमल किशोर कठेरिया (यू पी ),श्री लारेबअकरम( यू पी) , श्री शशि शेखर सिंह( दिल्ली) , यादव रेड्डी (हैदराबाद) शामिल है ।
    आगरा की मीटिंग की अध्यक्षता इतिहासकार dr आर सी शर्मा ने की, मंच पर dr अरशद, प्रोफेसर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सिसाइंस,आगरा यूनिवर्सिटी, श्री देव प्रकाश शर्मा पर रहे। इस प्रोग्राम में डाक्टर सी पी राय,श्री शिरोमणि सिंह, श्री विनोद गोयल , Shri जितेंद्र यादव, श्री मजाज कुरेशी, श्री इरशाद, आदि उपस्थिति रही। श्री हरीश चिमटी ने मंच का संचालन किया।

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